Get to know us-Swami Amritanand (Anand Gopal Das )
मैं एक साधू जीवन जीता हूँ | मेरा पूरा जीवन गौ सेवा - ब्रज की तीर्थ स्थलियों का संरक्षण एवं नार्थ इस्ट में लगभग 25000 आदिवासियों के सामूहिक विवाह आदि सामाजिक सेवा कार्यों के करने का सौभाग्य प्राप्त है | वर्तमान में मैं चाहता हूँ की हमारे बच्चे एवं बच्चियां अपने सांस्कृतिक एवं वैदिक परम्पराओं को फिर से अपना लें जिससे मानवीय सभ्यता लौट आवे तथा अमानवीय कृत नष्ट हो | जिससे की विश्व शांति बनी रहे | अनेक बच्चों को अध्यात्मिक ज्ञान क्षेत्र में शिक्षित करने का अनुभव है |


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Our mission- Gurukulam Karshni Bhakti Dham
Here work is going on according to the concept of such a Gurukul where children will be trained about Vedic education, classical education, mythological education, Mahabharata, history, geography, and the life story of those great men. So that our children will be educated about Sanatan Vedic Hindu religion and can become true nurturers of customs and policies. So that world-fraternity can be re-established by removing the inequalities spread in the world. Along with the classical knowledge, we will give the children the complete knowledge of weapons and weapons through the trainers so that the people of zero demonic and demonic nature do not flourish in human sensitivity. Our children should be careful and destroy those destructive elements before time.
Our vision- गुरूकुलम् कार्ष्णि भक्ति धाम
यहाँ पर एक ऐसे गुरुकुल की परिकल्पना के अनुसार कार्य चल रहा है जहाँ बच्चों को वैदिक शिक्षा , शास्त्रीय शिक्षा , पौराणिक शिक्षा , महाभारत , इतिहास , भूगोल , एवं उन महापुरुषों की जीवन गाथा के बारे में बच्चों को प्रशिक्षित किया जायेगा | जिससे हमारे बच्चों को सनातन वैदिक हिन्दू धर्म के बारे में एवं रीति- नीति के सच्चे पोषक बन सकें, के बारे में शिक्षित किया जायेगा जिससे विश्व में फैली असमानताओं को दूर कर विश्व-बंधुत्व को पुनः स्थापित किया जा सके | शास्त्रीय ज्ञान के साथ -साथ हम बच्चों को अस्त्र -शस्त्र का भी सम्पूर्ण ज्ञान प्रशिक्षकों द्वारा दिलाएंगे जिससे कि मानवीय संवेदना शुन्य आसुरी एवं राक्षसी प्रवित्त के लोग पनपने न पायें | हमारे बच्चे सावधान रहें और समय से पूर्व ही उन विनाशक तत्वों को नष्ट कर सकें |
हम हमेशा आप के लिए तत्पर रहेंगे |












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गुरूकुलम् कार्ष्णि भक्ति धाम
आप सभी के सहयोग से पवित्र गंगा के तट पर हरिद्वार में गुरूकुलम् कार्ष्णि भक्ति धाम नाम से गुरुकुल निर्माण का कार्य चल रहा है । कार्य प्रगति पर है । ग्राउंड फ्लोर एवं फर्स्ट फ्लोर की छत डल चुकी है तथा थर्ड फ्लोर की छत का कार्य चल रहा है ।
यदि आप का सहयोग बना रहा तो 2024 तक हमारी इच्छा है की गुरुकुल में बच्चों को शिक्षा देना शुरू करेंगे ।
आप को एक जिज्ञासा हो सकती है कि इस गुरुकुल में नया क्या होगा ?
हमरी परिकल्पना के अनुसार “मैकाले” के बाद से हमारे देश की जो शिक्षा प्रणाली थी उसे पूरा नष्ट कर दिया गया और हमारी शिक्षा व्यवस्था के द्वारा केवल भारतीय सौहार्द को विगाड़ा गया । जिससे राज सत्ता के लोलुप केवल अपनी राजनीतिक रोटी सेकते रहे हैं । बहुत सारे लोगों ने जगह - जगह गुरुकुल की स्थापना की, परन्तु अपनी निजी विचार धारा थोप कर प्रायः वैदिक शिक्षा के नाम पर बच्चों को नास्तिक बना दिए हैं । हिन्दुओं के उत्थान के नाम पर एक नया कल्ट ही बना डाले । अर्थात् समझने वाली बात यह है कि हमारी आपसी फुट को और अधिक बढ़ावा दे दिए । परिणाम यह हुआ की हमारा और अधिक विभाजन हो गया, हम टुकड़े - टुकड़े हो गए । हमारे बच्चे दिग्भ्रमित हो गए और उनके अन्दर से शत्रु बोध समाप्त हो गया । समाज में अन्याय अत्याचार बढ़ता चला गया । शिक्षा का उद्देश्य केवल पेट भरने तक सीमित रह गयी है ।
हमारे समझ से गुरुकुल को प्राचीन वैदिक तरीके से आज की परिपेक्ष में स्थापित करना बहुत जरुरी हो गया है । भगवान श्री राम - भगवान श्री कृष्ण ने जैसे धर्म-अर्थ-काम और मोक्ष आदि की शिक्षा गुरुकुल में ग्रहण कर हमारे बच्चों के लिए आज भी
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प्रेरणा हैं । एक ऐसे गुरुकुल की आवश्यकता है जहाँ बिना भेद भाव के चार पुरुषार्थ और विशेष रूप से शास्त्र और शस्त्र दोनों की शिक्षा दी जाये । हमारे बच्चों को उनके शत्रुओं के बारे में बताया जावे । हमारे बच्चों में धर्ममय वैदिक ज्ञान को स्थापित किया जाये । वेद – पुराण – प्राचीन इतिहास - आधुनिक इतिहास तथा खगोल-भूगोल का स्पष्ट और न्याय संगत ज्ञान की आवश्यकता है ।
इस गुरुकुल में बौधिक एवं शारीरिक हर तरह से बच्चों को मजबूत किया जायेगा । यह गुरुकुल हमारा पायलट प्रोजेक्ट के रूप में स्थापित होगा । हमें विश्वास है कि हमारे शिक्षा प्रणाली को आगे चलकर सम्पूर्ण भारत में लागू करने को शिक्षाविद मजबूर होंगे । आने वाले समय में हम पुनः अपने मूल स्वरूप में स्थापित होंगे । जो हिन्दुओं की मूल अवधारणा है – हिन्दुर्दुष्टनृहः प्रोक्तो$नार्यनीतिविदूषकः । सद्धर्मपालको विद्वान् श्रौतधर्म परायणः ।। ( राम कोश )“हिन्दू दुष्टता को बर्दास्त न करने वाला, अनार्य निति को सर्वथा नष्ट करने वाला, अपने धर्म में अडिग रहने वाला धर्मपालक, धारण शक्ति का धनी, और वैदिक मर्यादा में रहने वाला”, है इसे जन - जन में स्थापित करने वाला हो । शक्ति सम्पन्न हो तथा अन्याय - अधर्म से लड़ने वाला हो । अनाचार-दुराचार से कभी समझौता न करने वाला हो ।
मैं जल्दी ही एक पुस्तक प्रकाशित करूँगा, जिससे अपनी सारी बातें आप के समक्ष रख सकूँ । फिर भी आप के सुझाव और सहयोग की आकांक्षा है ।
आशा करता हूँ कि विद्वद जन हमें प्रेरित करेंगे और भामाशाह सहयोग । आपका सहृदय आभार ।
स्वामी अमृतानन्द ( आनन्द गोपाल दास )